Typhoid fever :  मियादी बुखार के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार !
Blood sample with typhoid positive

Typhoid fever : मियादी बुखार के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार !

टाइफाइड बुखार को मियादी बुखार भी कहते हैं ! यह सालमोनेला बेसिलस टाईफोसिस नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है ! Typhoid fever in hindi के बैक्टीरिया अधिकतर रोगी के मल या यूरिन द्वारा शरीर से बाहर निकलते हैं ! यहां से यह किसी प्रकार से या मक्खियों द्वारा खाने पीने की चीजों में पहुंचते हैं ! या कुआं और तालाबों के पानी में कीड़ों के पहुंचने से वह पानी दूषित हो जाता है ! और इन्हीं दूषित खाने पीने की चीजों का प्रयोग करने से मनुष्य बीमार हो जाता है ! इसी तरह यह बीमारी फैला करती है ! इस बीमारी के बैक्टीरिया स्वस्थ शरीर में पहुंचने के 2-3 सप्ताह बाद इस रोग के लक्षण आते हैं !

इस बीमारी के हो जाने के बाद सारी जिंदगी इस बीमारी के होने का डर नहीं रहता है ! परंतु आराम हो जाने के बाद कुछ दिनों तक फिर दोबारा बीमारी होने का डर रहता है ! यदि यह दोबारा हो जाए तो 7 दिन के अंतराल पर काफी समय तक यह रोग चलता ही रहता है ! यह एक संक्रामक बीमारी है इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद 8 सप्ताह तक रोगी को दूसरे स्वस्थ और निरोग व्यक्तियों से अलग रखना चाहिए ! ज्वर क्रमशः बढ़कर 103 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंचता है ज्वर की अपेक्षा नाड़ी की गति मंद हो जाती है ! और जीभ श्वेत मलिन हो जाती है जिसके बाद जीभ पर लाल-लाल और कुछ उभरे हुए अंकुर आदि लक्षणों से इस रोग को पहचाना जा सकता है !

गर्दन पीठ तथा छाती पर भी लाल लाल दाने निकल आते हैं ! दानों में पानी भर जाने से दाने मोती की तरह चमकने लगते हैं ! इसलिए इसको बोलचाल की भाषा में मोतीझरा भी कहते हैं ! दानों में पानी सूखने के बाद उस की पपड़ी उतरने लगती है ! और शरीर पर गुलाबी रंग के निशान रह जाते हैं !

मियादी बुखार के कारण : causes of typhoid fever !

मियादी बुखार एक बैक्टीरिया सालमोनेला टाईफोसिस के संक्रमण द्वारा होता है ! इसका असर हमारे ब्लड फेफड़ों और आंतों पर विशेष रूप से होता है ! जो दूषित पानी फल फ्रूट और दूषित सब्जियों द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करता है ! यह संक्रामक बीमारी है इसलिए रोगी द्वारा एक दूसरे मे भी फैलती है ! इस बैक्टीरिया /Salmonella+typho का प्रमुख वाहक मक्खियां भी होती हैं ! जो रोगी के मल मूत्र पर बैठने के बाद खाने पीने की चीजों पर बैठती हैं और उसे दूषित कर देती हैं ! इन्हीं खाने पीने की चीजों का प्रयोग कर मनुष्य इस रोग से पीड़ित होता है ! हमें साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए सब्जियों फल फ्रूट का प्रयोग करने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लें !

मियादी बुखार के लक्षण : symptoms of typhoid fever !

इसमें गर्दन पीठ तथा छाती पर लाल कलर के दाने निकलते हैं और 24 घंटे के भीतर इन दानों में पानी भर जाता है ! पानी भरने की वजह से दाने मोतियों जैसे झलक ने लगते हैं ! दानों से पानी सूखने के बाद दानों से पपड़ी निकलती है और गुलाबी कलर के निशान शरीर पर रह जाते हैं /pneumonia- भी हो सकती है ! यह रोग लगभग 3 सप्ताह तक रहता है ! रोग के समय शरीर में सुस्ती काम करने की इच्छा नहीं होती है ! सिरदर्द, कपकपी, भूख ना लगना, पतले दस्त आना, नाक से रक्त स्राव, कब्ज और उदर शूल आदि लक्षण प्रतीत होते हैं ! यदि रोग दोबारा हो जाए तो 7 दिन के अंतराल पर बहुत दिनों तक रह सकता है ! ज्वर का क्रमशः बढ़ना और नाड़ी की गति मंद होना ! जीभ पर लाल दाने जीभ सफेद मटमैंली हो जाती है !

Typhoid fever :  मियादी बुखार के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार !

पथ्य आहार !

पहली अवस्था में बार्ली का पानी, आरारोट, ग्लूकोस आदि खाने में प्रयोग करना चाहिए ! यदि पतले दस्त आ रहे हो तो छेने का पानी देना चाहिए ! और अगर पतले दस्त ना आ रहे हो तो दूध भी दे सकते हैं ! तरल पदार्थ अधिक मात्रा में देना चाहिए ! पीने के लिए उबला पानी ही प्रयोग करें ! ऐसे में सभी लघु पाकी आहार दे सकते हैं ! जैसे पपीता, दलिया, केला, चीकू, सेव, मुसम्मी किशमिश, मुनक्का, संतरे, उबला आलू, दही, छाछ, इत्यादि ! रोगी को पूर्ण विश्राम देना चाहिए कोई भी श्रम करने पर बीमारी बढ़ सकती है ! रोगी के कपड़े व बिस्तर की पूर्ण साफ सफाई का ध्यान देना चाहिए ! मियादी बुखार का डायग्नोसिस विडाल परीक्षण द्वारा किया जाता है !

अपथ्य !

रोगी को कच्चे फल फ्रूट शाक नहीं देना चाहिए साथ ही दीर्घ पाकी आहार बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए ! यथासंभव पाचक चीजों का प्रयोग करें जिससे आंतों की क्रियाशीलता पर ज्यादा असर ना पड़े ! खाने में मीट, मांस, मछली का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें ! इससे आंतों पर विपरीत असर पड़ने के कारण रोगी और कष्ट में आ जाता है ! साथ ही रोगी के मल मूत्र का निस्तारण सही ढंग से ना किया जाए तो इससे और लोगों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है ! खासकर रोगी को खुले में शौच करने से बचना चाहिए !

मियादी बुखार का आयुर्वेदिक उपचार : Ayurvedic treatment of typhoid fever !

1-अंजीर :

टाइफाइड बुखार के लिए आपको दो अंजीर 10 से 12 मुनक्के और खूब कला 1 से 2 ग्राम लेना है ! इन तीनों को मिलाकर चटनी बना लीजिए और इसका सेवन सुबह-शाम करें कैसा भी मियादी बुखार ( टाइफाइड) हो ! 3 दिनों में ही यह रोग ठीक होने लगता है ! 1 हफ्ते में पूरी तरह से ठीक हो जाता है ! इससे शरीर को बल प्राप्त होकर रोगी धीरे-धीरे ठीक होने लगता है ! आप चाहे तो इसकी चटनी ना बनाकर ऐसे ही खा सकते हैं ! यह दोनों तरह से उतना ही लाभ पहुंचाता है

Positive blood sample

2-गिलोय :

गिलोय का प्रयोग आयुर्वेद मैं बैक्टीरियल और वायरल डिजीज के लिए भी किया जाता है ! और इस तरह के इंफेक्शन वाले डीजिज के लिए भी बहुत सारे जड़ी बूटियों के ऊपर बहुत तरह के एक्सपेरिमेंट किए गए जिसमें पाया गया कि गिलोय इनफेक्शन को रोकने के लिए सबसे उपयुक्त दवा है ! शरीर में टूटन रहती है दर्द रहता है बुखार सा बना रहता है आप उसको उबालकर काढ़ा बनाकर पी सकते हैं ! इसके अलावा गिलोय की घनवटी का टेबलेट बनी हुई आती है ! यह बिल्कुल निरापद होती है सबसे बड़ी बात है कि इससे किसी भी तरह से हानि नहीं है ! साल भर के बच्चे से लेकर के 90 साल का बुजुर्ग तक गिलोय का सेवन कर सकता है ! आप किसी भी तरह की चिकित्सा पहले से ले रहे हो तब भी साथ मेकअप गिलोय का सेवन कर सकते हैं !

3-त्रिफला चूर्ण :

यह एक आवश्यक आयुर्वेदिक चूरन है जो बुखार और टाइफाइड पर सकारात्मक प्रभाव दिखाता है। यह साल्मोनेला टाइफी के विकास को बाधित करता है। रसायनज्ञ इसे पाउडर और गोलियों के रूप में सेवन करने की सलाह देते हैं !

4-तुलसी :

पवित्र तुलसी एंटीबायोटिक और रोगाणुरोधी है। तुलसी को उबले पानी में मिलाएं और रोजाना तीन से चार कप पिएं। तुलसी प्रतिरक्षा को बढ़ाती है ! और पेट को शांत करती है। या फिर आप 4-5 तुलसी / तुलसी के पत्तों का पेस्ट बना सकते हैं। इस पेस्ट में केसर पाउडर या केसर या केसर की कुछ किस्में मिलाएं। हर भोजन के बाद इस मिश्रण का सेवन करें।

मियादी बुखार का निदान houw diagnose typhoid fever

विडाल टेस्ट एक विधि है जिसका उपयोग मियादी बुखार की जांच करने के लिए किया जाता है ! हालाँकि यह परीक्षण आमतौर पर संयुक्त राज्य या अन्य विकसित देशों में नहीं किया जाता है ! फिर भी यह कई उभरते देशों में उपयोग में आता है ! जहाँ एंटरिक बुखार एंडेमिक है ! चिंताएं विडाल परीक्षण की विश्वसनीयता के बारे में रहती हैं। यह टाइफाइड बुखार के लिए विशिष्ट और अविश्वसनीय नहीं है ! और आंत्र ज्वर एक जानलेवा बीमारी है !

जो जीवाणु साल्मोनेला एंटरिका सेरोटाइप टायफी (एस। टाइफी) के संक्रमण के कारण होती है ! जो आमतौर पर प्रदूषित भोजन और पेय पदार्थों के माध्यम से फैलता है ! विकासशील देशों में, जैसे कि अफ्रीका में, संस्कृतियों के बजाय विडाल परीक्षण का उपयोग जारी है क्योंकि यह जल्दी, सरल और प्रदर्शन करने के लिए कम खर्चीला है !

मियादी बुखार के रिस्क

जिन लोगों को टाइफाइड बुखार typhoid fever का इलाज नहीं मिलता है ! उन्हें महीनों तक इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। उन मामलों में, गुर्दे की विफलता या आंतों के रक्तस्राव (गंभीर रक्तस्राव) जैसी जटिलताएं संभव हैं ! गंभीर मामलों में यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो टाइफाइड बुखार घातक है ! वे वाहक भी बन सकते हैं और बीमारी को दूसरों तक फैला सकते हैं !

मियादी बुखार का खतरा किसे है

खराब स्वच्छता के साथ टाइफाइड और पैराटाइफाइड बुखार दुनिया के कुछ हिस्सों में सबसे आम हैं। इसमें मुख्य रूप से एशिया (विशेष रूप से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश), अफ्रीका, कैरिबियन, मध्य और दक्षिण अमेरिका और मध्य पूर्व के कुछ क्षेत्र शामिल है। मियादी बुखार रोगी के दोस्तों या रिश्तेदारों से मिलने वाले लोगों को टाइफाइड बुखार होने की संभावना अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है ! संयुक्त राज्य अमेरिका में हर साल लगभग 350 लोगों को टाइफाइड बुखार का पता चलता है ! उनमें से अधिकांश लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करते थे !

हाथों को अच्छी तरह धोऐं

20 सेकंड के लिए अक्सर साबुन और पानी से हाथ धोएं, विशेष रूप से बाथरूम का उपयोग करने के बाद और खाने से पहले यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं हैं ! तो अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें जिसमें कम से कम 60% अल्कोहल शामिल हो !

मियादी बुखार से कैसे बचें

एक टाइफाइड बुखार टीकाकरण प्राप्त करना महत्वपूर्ण है ! वर्तमान में टाइफाइड बुखार के प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए दो टीके उपलब्ध हैं। साथ ही कच्चे या अधपके भोजन से परहेज करें ! केवल बोतलबंद पानी या उबला हुआ पानी पीना है खाने से पहले हर बार अपने हाथों को धोएं ! कच्चे फलों और सब्जियों को छीलने से बचें। स्ट्रीट वेंडर से खरीदे गए खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को खाने से बचें ! केवल उन्हीं खाद्य पदार्थों का सेवन करें जो जो गर्मागर्म तरह से जाते हैं। ऐसे भोजन से बचें जो बुफे मे परोसे जाते हों, कच्चे फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं !

क्या टाइफाइड बुखार संक्रामक है

टाइफाइड बुखार बहुत संक्रामक है और दूषित भोजन या पानी में बैक्टीरिया के द्वारा होता है। तीव्र बीमारी वाले रोगी संक्रमित मल के माध्यम से आसपास के पानी की आपूर्ति को दूषित कर सकते हैं ! जिसमें बैक्टीरिया की उच्च एकाग्रता होती है। यह हवा के माध्यम से नहीं फैलता है (खांसी के द्वारा) या छूने से भी नहीं फैलता है ! जब तक की (Typhoid fever in hindi) रोगी का शरीर मल मूत्र से संक्रमित ना हो !

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