Measles rubella खसरा रूबेला बीमारी और टीकाकरण

Measles rubella खसरा रूबेला बीमारी और टीकाकरण

खसरा रूबेला Measles rubella एक घातक रोग है ! तथा यह बच्चों में विकलांगता या मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है ! खसरा अत्यधिक संक्रामक रोग होता है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छिंकने से फैलता है ! खसरे की वजह से बच्चों में प्राणघातक जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है ! जैसे निमोनिया, डायरिया, और मस्तिष्क का बुखार इत्यादि !

सामान्य तौर पर खसरे के लक्षणों में शामिल है ! चेहरे पर गुलाबी लाल चकत्ते, अत्यधिक बुखार, खांसी, नाक बहना और आंखों का लाल हो जाना इत्यादि ! इसके अलावा अगर स्त्री को गर्भ अवस्था के आरंभ में रूबेला का संक्रमण होता है तो उन्हें CRS (जन्मजात रूबेला सिंड्रोम) विकसित हो सकता है !

जो भ्रूण और नवजात शिशुओं के लिए घातक सिद्ध हो सकता है ! प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान रूबेला से संक्रमित माता से जन्मे बच्चे में ! जन्मजात विसंगतियों से प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती हैं !

जिससे ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, बहरापन, माइक्रोसिफैली, मानसिक मंदता तथा दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ! साथ ही रूबेला से प्रभावित गर्भवती स्त्री में गर्भपात, समय से पूर्व जन्म, और मृत प्रसव की संभावनाएं बढ़ जाती हैं !

खसरे का विष शरीर में फैलने के 10 12 दिन बाद सर्दी खांसी और छिकें आने लगती हैं ! नाक का बहना और आंखें लाल हो जाती हैं ! साथ ही शरीर में दर्द /body-pain स्वर भंग युक्त खांसी आती है ! पीठ और हाथ पैरों में दर्द के साथ बुखार शुरू होता है !

इसके 3-4 दिन बाद खसरा के दाने निकलना आरंभ होता है ! खसरे के दाने पहले चेहरे पर, गर्दन पर, फिर छाती पर और अंत में पूरे शरीर पर निकलते हैं ! खसरे के दाने तीन-चार दिन रहने के बाद !

स्वयं ही मिट जाता है ! और साथ ही बुखार भी ठीक होने लगता है ! खसरे के दानों का अत्यधिक लाल या काला होना भी खतरनाक होता है !

क्यों होता है खसरा causes of measles rubella

खसरा measles rubella एक वायरस जनित बीमारी है ! खसरा के वायरस पीड़ित के नाक के स्राव खांसने एवं छिंकने के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है ! अक्सर खसरा की बीमारी बसंत और शरद ऋतु में व्यापक रूप से फैलती है ! ज्यादातर खसरा की बीमारी बच्चों को ही हुआ करती है ! अधिक उम्र वालों को यह समस्या नहीं होती है ! यदि होता है तो फिर वह भयानक सिद्ध हुआ करता है !

वैसे यह माना जाता है ! कि खसरा बीमारी जीवन में एक बार ही होती है ! इसके दोबारा होने की संभावना कम होती हैं ! गर्भावस्था के समय स्त्रियों में रूबेला वायरस के संक्रमण की वजह से बच्चों में खसरा बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है !

Measles rubella खसरा रूबेला बीमारी और टीकाकरण

खसरा के लक्षण measles rubella symptoms

अत्यधिक संक्रामक रोग होता है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है ! खसरे का संक्रमण होने के 10-12 दिन बाद सर्दी खांसी और छिंक आती है ! नाक बहती है और आंखें लाल हो जाती हैं साथ ही आंखें पानी से भरी रहती हैं ! हाथ पैरों में दर्द के साथ बुखार आता है !

इसके 3-4 दिन बाद खसरे measles rubella के दाने निकलने पर आरंभ हो जाते हैं ! खसरे के दाने सबसे पहले चेहरे पर गर्दन पर और छाती पर तथा इसके बाद अंत में पूरे शरीर पर निकल आते हैं ! यह दाने तीन-चार दिन रहने के बाद स्वत: ही मिट जाते हैं !

  • संक्रमण के 10 12 दिन बाद सर्दी खांसी छींक आना
  • हाथ पैरों में दर्द के साथ बुखार आना
  • बुखार के तीन-चार दिन बाद दाने निकलना
  • दानों का सर्वप्रथम चेहरे पर निकलना
  • फिर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दाने निकलना
  • नाक से पानी बहना
  • आंखें लाल होना
  • सिर में दर्द
  • स्वर भंग युक्त खांसी
  • अरुचि
  • उल्टी
  • कबज या पतले दस्त
  • श्वास नली प्रदाह
  • फेफड़े का प्रदाह
  • सांस लेने में कष्ट

खसरा रूबेला कितना खतरनाक हो सकता है measles rubella

बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है लेकिन जब इस्त्री गर्भावस्था के आरंभ में रूबेला वायरस से संक्रमित होती है ! तो उसके पेट में पल रहे बच्चे को संक्रमण होने की संभावना काफी होती हैं ! ऐसी स्थिति में बच्चे के साथ-साथ मां को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है !

जैसे गर्भपात, मृत प्रसव, समय से पूर्व प्रसव, सीआरएस, बच्चे में दिल, आंखों का रोग, मस्तिष्क की बीमारियां, कान की बीमारियां इत्यादि ! measles rubella रोग से संक्रमित मां या शिसु 1 वर्ष से भी ज्यादा समय तक इस वायरस को मल द्वारा त्यागता है ! यह समुदाय में अन्य के लिए भी संक्रामक है !

खसरे की संभावित जटिलताएं

डायरिया ( दस्त) निमोनिया और मस्तिष्क की सूजन 60 प्रतिशत खसरा संबंधित मृत्यु का कारण बन सकता है ! सीआरएस से पीड़ित बच्चे को बाहरापना, अंधापन, ह्रदय संबंधित दोष और अन्य आजीवन विकलांगताएं हो सकती हैं ! कम प्रतिरोधक क्षमता कुपोषित बच्चों और विटामिन ए की कमी वाले व्यक्तियों को खसरे की संभावना ज्यादा होती है !

ऐसे बच्चे या वयस्क जिनका measles rubella टीकाकरण नहीं हुआ है अगर वह ऐसे शिशु के संपर्क में आता है जिसे (सी आर एस) जन्मजात रूबेला सिंड्रोम है तो उसे खतरा होने की संभावना बढ़ जाती है !

Measles rubella खसरा रूबेला बीमारी और टीकाकरण

खसरा रूबेला टीकाकरण measles rubella vaccination

खसरा से बचाव के लिए खसरा रूबेला वैक्सीन (MR) 9 माह से लेकर 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को खसरा की खुराक दी जाती है ! बच्चे को चाहे नियमित टीके की खुराक किसी भी दिन दी गई हो फिर भी measles rubella बेक्सीन की खुराक देना आवश्यक होता है ! क्योंकि यही एक बार होने वाली गतिविधि है ! और अतिरिक्त खुराक से बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है !

साथ ही 16 से 24 महीने की उम्र में बच्चे को खसरा रूबेला की दूसरी खुराक के लिए टीका कृत करना अनिवार्य होता है ! 14 वर्ष तक की ऐसी किशोरियों जिनको महावारी हो रही होती है उन्हें भी खसरा रूबेला की खुराक दी जानी चाहिए ! माहवारी के दौरान टीका लगने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है !

खसरा रूबेला के बारे में मुख्य बातें

खसरा रूबेला के बारे में कुछ निम्नलिखित बातों को लिस्ट के अनुसार समझते हैं !

  • खसरा भारत में प्रतिवर्ष करीब 49200 बच्चों की मृत्यु का कारण बनता है !
  • खसरा रूबेला वायरस अत्यधिक संक्रामक होते हैं यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने छींकने के कारण बूंदों से फैलते हैं !
  • खसरा के संक्रमण का खसरा के चकत्ते के नजर आने के 4 दिन पहले से लेकर चकत्ते के मिट जाने के 4 दिन बाद तक रहता है !
  • गर्भावस्था के दौरान रूबेला संक्रमण के कारण गर्भपात मृत प्रसव तथा समय पूर्व प्रसव हो सकता है !
  • खसरा measles rubella जटिलताओं को पैदा कर सकता है जैसे डायरिया, निमोनिया, ह्रदय रोग, मस्तिष्क रोग, मुंह में अल्सर, कान में संक्रमण और इससे मृत्यु भी हो सकती है !

This Post Has 4 Comments

  1. Jamesmence

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